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Aaj ke Yuva Shaadi Karna Kyun Nahin Chahte

Aaj ke Yuva Shaadi Karna Kyun Nahin Chahte

R.Kumar Pandey

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विवाह को एक धार्मिक संस्कार के रूप में सनातन धर्म में स्वीकार किया गया है। शिक्षा प्राप्त करने के बाद हर माता-पिता अपने बच्चे का विवाह कर देना चाहते हैं।

 पहले के युवा तो विवाह के नाम से ही अति उत्साहित हो जाते थे और विवाह का बड़ी बेसब्री से इंतजार करते थे, लेकिन आज के युवा विवाह को टालते हैं और कॅरियर तथा शिक्षा के प्रति उनका रुझान सबसे ज्यादा है।

जब भी अभिभावक युवक या युवती से विवाह के संबंध में बात करते हैं तो उनका एक ही जवाब होता है कि 'अभी हम विवाह के लिए पूरी तरह से तैयार नहीं हैं। आर्थिक रूप से संपन्न और स्वतंत्र होने के बाद विवाह करने के बारे में हम सोचेंगे। 

' युवाओं का कहना तो ठीक है, लेकिन इसके साथ ही यह भी तो देखना आवश्यक है कि विवाह की एक उम्र होती है। उस उम्र के निकल जाने के बाद विवाह करने का कोई औचित्य ही नहीं रह जाता है। इसलिए युवाओं के लिए बेहतर सलाहें प्रस्तुत पुस्तक में हैं ताकि वे कॅरियर तथा उम्र को ध्यान में रखकर विवाह करने का निर्णय ले सकें।

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Regular price INR. 396
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Product Details

Language

  • HIN- Hindi

ISBN

9789348922489

Binding

Hard Cover

Age Group

  • Adults

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Book Dimension

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