Shashi Tharoor ka Oxford Union mein Bhashan
Shashi Tharoor ka Oxford Union mein Bhashan
V.S.Baghel
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हमारी समझ में हमें शशि का आभार इस बात के लिए मानना चाहिए कि इस मुआवजे की माँग के बहाने उन्होंने अँग्रेजी राज की विरासत का तटस्थ लेखा-जोखा तैयार करने के लिए हम सभी को उद्वेलित किया है। करीब दो सौ साल के इतिहास के बारे में ही नहीं, आज के जनतांत्रिक हिंदुस्तान की विषमता से पीड़ित असलियत के लिए अँग्रेजों की जिम्मेवारी के बारे में भी पश्चिमी खासकर विलायती सोच, और लगभग प्रायोजित बौद्धिक अभियानों की पड़ताल की जरूरत है। बात इतनी-सी नहीं कि अँग्रेज उदीयमान शक्ति भारत में अपने मुनाफाखोर कारोबार को फैलाने के लिए ब्रिटेन की मौजूदा या भविष्य की कोई सरकार माफी माँग लेगी या शायद प्रतीकात्मक मुआवजा भी देना कबूल कर ले। समस्या यह है कि क्या हम एक बार फिर शहद सनी बातों के झाँसे में फँस जाएँगे? कब तक विलायत और अमेरिका में अपनी छवि के संदर्भ में ही नीति-निर्धारण करते रहेंगे?
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Product Details
Language
Language
- HIN- Hindi
ISBN
ISBN
9789392719394
Binding
Binding
Hard Cover
Age Group
Age Group
- Adults
