Shor-E-Kayamat
Shor-E-Kayamat
Rajendra Kumar Meena
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शोर-ए-क़यामत से यहां पर अभिप्रेत है, प्रेयसी की असहनीय याद, जो वक़्त बेवक़्त आती रहती है और जब यह आती है तो प्रेमी सब कुछ भुला करके अपना ध्यान जिस केंद्र बिंदु पर केंद्रित करता है। इश्क़ की कायनात में चारों ओर रंगीनियों के इंद्रधनुषी रंग बिखरे हुए हैं। प्यार के इस जहां में वो बड़े खुशनसीब होते हैं जिन्हें मुहब्बत में मंजिल मिल जाती है अर्थात् वो अपनी प्रेयसी को हमेशा के लिए प्राप्त कर जिंदगी की राह में हमराह बन जाते हैं तथा जिंदगी का हसीं सफ़र अंतिम सांस तक साथ-साथ चलकर तय करते हैं। किंतु इनकी संख्या बहुत कम है। उल्फ़त की इस दुनिया में अधिकांश प्रेमियों को अपनी मंजिल नहीं मिल पाती है। इस दुनिया के जालिम रस्मो-रिवाज उनके आड़े आ जाते हैं । कुछ इश्क़ की राह पर सिर्फ दो कदम ही चल पाते हैं कि वक़्त की आंधी में उनकी राह और मंजिल हमेशा-हमेशा के लिए न जाने कहां गुम हो जाती है। प्रथम बहार के साथ गुज़ारे हुए लम्हों की जब प्रचंड यादें वक्त-बेवक्त आती हैं तो उसको शोर-ए-क़यामत कहा जाता है। इसी उद्देश्य से इस कृति का जन्म अतिरिक्त जिला कलक्टर एवं अतिरिकत जिला मजिस्ट्रेट, राजेन्द्र कुमार मीणा 'राजेन्द्र' की लेखनी से हुआ है। जिसमें सभी प्रचलित विधाएं गीत, गजल, मुक्तक और कविताएँ संग्रहित हैं। उन्होंने अपनी कविताओं के द्वारा जीवन-जगत के अनेक पक्षों का बड़ी मार्मिकता से उद्घाटन किया है। "कुछ हाल ना पूछो इश्क में, शिकस्ते दिल के, मारों का, गमें-उलफ़त में, रोज निकलता है दम, यहां पर हजारों का। सुपुर्दे खाक हो गई, जहाने मुहब्बत में, कैसी-कैसी हंसी सूरतें, कायनाते-इश्क़ में, हरसू ढेर लगा हुआ है, बेबस मजारों को।"
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Product Details
Language
Language
- HIN- Hindi
ISBN
ISBN
9789383277070
Binding
Binding
Hard Cover
Age Group
Age Group
- All Age Groups
- Adults
No. of pages
No. of pages
128
Book Dimension
Book Dimension
22.5 cm x 15 cm x 1.5 cm
Item Weight
Item Weight
360 grams
