Suman-sugandh
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Om Shiv Raj
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क्या कारण था कि एक प्रतिष्ठित अधिवक्ता का पुत्र युवास्था में पदार्पण करते ही घरबार छोड़कर संन्यासी हो गया? संन्यासी भी ऐसा कि उसके विचारों का डंका संसार में बजने लगा। उसके सुमन की सुगंध भारत में ही नहीं, समुद्र-पार अमेरिका में भी फैल गई। उन्होंने संपूर्ण मानवजाति के उत्थान के लिए सनातन वैदिक धर्म की ध्वजा को सागर-पार अमेरिका जैसे पूँजीवादी देश में फहराया। आज दानवी प्रवृतियाँ बढ़ती जा रही हैं। मनुष्यत्व के दर्शन दुर्लभ हो रहे हैं। इसलिए पहले मनुष्य का निर्माण होना चाहिए। देशभक्त मनुष्य! अखिल विश्व के कल्याण का विचार करने वाला मनुष्य! विभिन्न सम्प्रदायों के कठिन कवचों को छिन-भिन्न कर मानव-धर्म के सुमंगल स्तोत्र का मान करने वाला देव मनुष्य! सेवावर्ती मनुष्य! आत्मानुरागी मनुष्य! अपनी कामनाओं की आहुति देकर पर ब्रह्म में रमने वाला मनुष्य! यदि ऐसा नहीं हुआ तो देश में शासन होगा हिंस पशुओं का ! मुट्ठीभर सत्ताधारी सब प्रकार के भोग भोगने, परंतु सर्वसाधारण जन दरिद्रता-भय और भ्रष्टाचार की क्रूर चक्की में पिसते रहेंगे। इसलिए पहले सच्चा मानव बनना होगा। सदैव जाग्रत रहने वाला मनुष्य बनना होगा। भारतीयो ! उठो, जागो ! यही है स्वामी विवेकानन्द का सन्देश ! विवेकानन्द की जीवनी पर आधारित सरल-सहज रोचक भाषा शैली में लिखा यह उपन्यास पाठक को सदैव जागरुक मानव बनने की प्रेरणा देता रहेगा ।
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Om Shiv Raj
