Swami Shradhanand
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अपने महान व्यक्तित्व एवं श्रेष्ठ कार्यों के कारण मुंशीरामजी बैरिस्टर, मुंशीरामजी से महात्मा मुंशीरामजी बने और महात्मा मुंशीरामजी बन जाने के बाद स्वामी श्रद्धानंद बने। स्वामी श्रद्धानंद भारत देश की उस गौरवशाली महान विभूति का नाम है, जिसके आगे सभी का सिर श्रद्धापूर्वक अपने आप ही झुक जाता था और उनका नाम लेते ही आज भी हम सभी भारतवासियों का सिर श्रद्धा के कारण स्वत: ही झुक जाता है। महात्मा मुंशीरामजी ने संन्यास लेने के बाद खुद अपना नाम ‘श्रद्धानंद’ रखा था। अपने नाम के औचित्य के बारे में वे इस समारोह में लोगों से कहने लगे कि मैंने श्रद्धा से प्रेरित होकर ही अब मैं संन्यास जीवन में प्रवेश कर रहा हूँ। इस कारण इस यज्ञकुंड की अग्नि को साक्षी रखकर मैं अपना नाम ‘श्रद्धानंद’ रख रहा हूँ ताकि मैं अपना आगे का संपूर्ण जीवन श्रद्धामय बना सकूँ। यह पुस्तक इस महापुरुष की जीवन गाथा है जो सरल भाषा शैली में लिखी गई है।
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