Skip to product information
1 of 1

Taliban

Taliban

Vimla Devi

SKU:

अतीत में या वर्तमान में बहुतों से सुना है कि अरब में अगर कोई चोरी करता है तो शरीयत के नियमानुसार उसके हाथ-पैर काट दिए जाते हैं। शरीयत नियमों का विरोधी होना अगर गुनाह है तो भारत में शरीयत के नियम क्यों नहीं माने जाते? भारत में चोर डकैतों (मुसलमान) के हाथ क्यों नहीं काट दिए जाते? और भारतीय संविधान संरचना के समय मुसलमानों ने अपने पारिवारिक नियमों (पर्सनल लॉ) की संवैधानिक स्वीकृति प्राप्त कर ली है। उनका तर्क था, कुरान के नियमों को मर्यादा देनी होगी। कुरान को मर्यादा देने के क्रम में ही दुनिया के इस्लाम धर्म के विशेषज्ञों ने सलमान रशदी, दाऊद हैदर, तसलीमा नशरीन एवं अन्य अनेकों के जीवन को नरक बना दिया है। उनसे मेरा साधारण सा सवाल है-कुरान में उल्लिखित अल्लाह के नियमों के विषय में अगर आप इतने ही सचेत हैं, तो चोरी के अपराध में हाथ काट डालने के नियम को शामिल किए जाने का दावा क्यों नहीं करते। शरीयत के नियमों के अनुसार फौजदारी मामलों में विचार फैसले का दावा क्यों नहीं किया या क्यों नहीं कर रहे? एक ही कुरान में उल्लिखित पारिवारिक नियमों (पर्सनल लॉ) का लाभ आप उठाएँगे और क्रिमिनल मामलों के लिए निर्दिष्ट नियमों की आप अवमानना करेंगे ऐसा कैसे हो सकता है? मेरे अनुसार इसका एक ही अर्थ हो सकता है, आंशिक रूप से ही सही, आपने कुरान की अवमानना की है। आपने अपने नबी का अपमान किया है। तालिबान का जिस रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है, वह कुरान में कहीं भी उल्लिखित नहीं है।

Quantity
Regular price INR. 520
Regular price INR. 650 Sale price INR. 520
Sale Sold out
Shipping calculated at checkout.

Binding

Hard Cover

Author

Vimla Devi

View full details