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Tapoo Ke Lootere

Tapoo Ke Lootere

Sarvesh Tiwari

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समुद्र कभी अपने सारे रहस्य नहीं बताता।

हिंद महासागर के बीच बसा मॉरीशस भी ऐसा ही एक द्वीप है। दुनिया इसे सफेद रेत, नीले पानी और शांत जीवन के लिए जानती है। लेकिन इसकी चमक के नीचे एक ऐसा इतिहास दफन है, जिसे पढ़ना आसान नहीं। कुछ दस्तावेज खो गए, कुछ आवाज़ों को दबा दिया गया, और कुछ सच इतने असुविधाजनक थे कि समय ने उन्हें भुला देना ही बेहतर समझा।

"टापू के लुटेरे" उसी भूले हुए इतिहास की खोज है।


यह पुस्तक एक ऐसे रहस्य से शुरुआत करती है, जो जितना सरल दिखता है, उतना है नहीं। एक समय मॉरीशस में हिंदी के कई अखबार प्रकाशित होते थे, आज एक भी नहीं है। क्या यह केवल बदलती पीढ़ियों की कहानी है, या इसके पीछे सत्ता, भाषा और इतिहास का कोई ऐसा खेल छिपा है, जिसकी परतें अब तक पूरी तरह नहीं खुलीं?

एक पत्रकार की वर्षों लंबी खोज इस प्रश्न का पीछा करती है। दुर्लभ अभिलेख, पुराने हिंदी समाचारपत्र, निजी दस्तावेज, भूले-बिसरे साक्षात्कार और इतिहास की बिखरी कड़ियाँ धीरे-धीरे एक ऐसी तस्वीर बनाते हैं, जिसमें फ्रांसीसी और ब्रिटिश शासन, आर्थिक हित, सांस्कृतिक वर्चस्व और भाषा की राजनीति एक-दूसरे से जुड़ते चले जाते हैं।

लेकिन इस कहानी में सबसे बड़ा रहस्य किसी खज़ाने का नहीं, बल्कि स्मृति का है। किसी समाज से उसकी भाषा, उसकी आवाज़ और उसका इतिहास कैसे छीन लिया जाता है, और फिर भी कुछ लोग उसे बचाए रखने में कैसे सफल हो जाते हैं।

यह पुस्तक उत्तर देने से पहले प्रश्न खड़े करती है। और जब अंतिम पन्ना बंद होता है, तब एहसास होता है कि इस टापू से सबसे बड़ी लूट शायद ज़मीन या दौलत की नहीं, बल्कि उसकी याददाश्त की हुई थी।

Quantity
Regular price INR. 796
Regular price INR. 995 Sale price INR. 796
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Product Details

Language

  • HIN- Hindi

ISBN

9789372690002

Binding

Hard Cover

Age Group

  • Adults

No. of pages

359

Book Dimension

22.5 cm x 15 cm x 2 cm

Item Weight

589grams

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