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Tedha Saval

Tedha Saval

Om Prakash Sondhi

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शाहजहाँ ने आसिफ खाँ की ओर देखा, "आप ठीक कहते हैं। माँ बदौलत भी ऐसा ही सोच रहे थे। अभी यह हमारे बारे में लिखने का काम करेंगे।" अब्दुल हमीद ने कहा, "जहाँ पनाह, अगर आप इजाजत दें तो मैं उस तारीख का नाम 'बादशाह नामा' रखना चाहता हूँ। शाहजहाँ ने मुस्कराते हुए कहा, "हमें यह बात पसन्द आई। तुम्हें इजाजत है।" "मुबारक हो" शाहजहाँ जिन्दाबाद" का स्वर वातावरण में फैल गया। अब्दुल हमीद ने सत्कार से सिर झुका दिया। "शाहजहाँ जिन्दाबाद के नारे लगते रहे। शाहजहाँ उठा और दरबार छोड़ कर रंग महल चला गया।

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Hard Cover

Author

Om Prakash Sondhi

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