Teen Pramukh Krantiyan
Teen Pramukh Krantiyan
Dr. Arvind Arora
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रूस की 1917 की महान अक्टूबर क्रांति के बाद दुनिया में तीन प्रमुख क्रांतियाँ हुई। इन तीनों क्रांतियों में दो समानतायें थीं। एक तो यह कि तीनों ही मार्क्सवाद से प्रेरित थीं और दूसरे तीनों में गुरिल्ला युद्ध की रणनीति का प्रयोग किया गया। एक और बात थी जो तीनों में समान थी कि तीनों क्रांतियों में दुश्मन संयुक्त राज्य अमरीका था। आदि काल से आज तक युद्ध मानव सभ्यता का अंग रहा है। सतयुग में देव-असुर संग्राम, त्रेता में राम-रावण युद्ध और द्वापर में महाभारत युद्ध। बगैर युद्ध के कोई काल परिपूर्ण नहीं हुआ। मध्य युग में भी चंगेज़ खाँ, अटिला, महमूद गजनवी मोहम्मद गौरी और बाबर आदि आदि ने युद्ध से ही कामयाबी हासिल की। युद्धों में आयुधों और तकनीक का बराबर विकास होता गया। गुरिल्ला युद्ध की तकनीक कोई नई नहीं है। इस तकनीक का प्रयोग आदिकाल से ही एक ताकतवर दुश्मन को छकाने और उस पर विजय प्राप्त करने के लिये होता आया है। हनुमन ने इसका प्रयोग अहिरावण और रावण के विरुद्ध किया और लंका में आग लगा दी। शिवाजी ने इसका प्रयोग औरंगजेब की ताकवर मुगल सेना के विरुद्ध किया। गुरिल्ला युद्ध अनेक देशों में अनेक नेताओं के नेतृत्व में लड़ा गया। 'तीन प्रमख क्रांतियाँ' गुरिल्ला युद्ध पर ही आधारित है और इतिहास छात्रों के लिए ही नहीं बल्कि प्रत्येक पाठक के लिए अंत्यत ही महत्त्वपूर्ण पुस्तक है।
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Product Details
Language
Language
- HIN- Hindi
ISBN
ISBN
9789392717475
Binding
Binding
Hard Cover
Age Group
Age Group
- Adults
No. of pages
No. of pages
264
Book Dimension
Book Dimension
22.5 cm x 15 cm x 2 cm
Item Weight
Item Weight
420 grams
