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Tibet : Kal, Aaj Aur Kal

Tibet : Kal, Aaj Aur Kal

Bimla Devi Vimla Devi

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तिब्बत क्यों स्वतंत्र नहीं रह सकता? कहते हैं कि पहले स्वतंत्र नहीं था। उसको स्वतंत्र होने का अधिकार नहीं हो सकता ! क्या जहाँ पहले गुलामी थी, वहाँ अब भी गुलामी रहनी चाहिए?

अगर अल्जीरिया की स्वतंत्रता की आवाज का हम समर्थन कर सकते हैं और वह समर्थन करना फ्रांस के अन्दरूनी मामलों में दखल देना नहीं है तो तिब्बत की स्वतंत्रता का समर्थन चीन के अन्दरूनी मामलों में दखल कैसे हो सकता है?

चीनी साम्राज्यवादी अपने पशुबल के द्वारा तिब्बत की स्वतंत्रता की आवाज को दबा सकते हैं मगर स्वतंत्रता की पिपासा को मिटाया नहीं जा सकता।

दमन उस आन्दोलन में घी का काम करेगा जो आज नहीं तो कल तिब्बत की जनता अपनी स्वतंत्रता को प्राप्त करके रहेगी। माओ-त्से-तुंग ने 1930 में कहा था, कि हमने ऐसा संविधान बनाया है कि अगर हम में से कोई बाहर जाना चाहेगा, तो बाहर जा सकेगा, तिब्बती तो बाहर जाने की बात नहीं करते थे। वे तो अपना पृथक अस्तित्व रखना चाहते थे मगर उन्हें इसकी इजाजत नहीं दी गई।

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Regular price INR. 520
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Product Details

Language

  • HIN- Hindi

ISBN

9789383323012

Binding

Hard Cover

Age Group

  • Adults
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