Skip to product information
1 of 1

Touhid Ke Mat Men Rang De

Touhid Ke Mat Men Rang De

Uma Pathak

SKU:

‘ओ परमात्मा मेरे तन-मन को प्रेम के पक्के रंग में रँगकर एकरंग कर दे।

‘ इस रंग में रँगने के बाद जाति-पाँति, धर्म-संप्रदाय वगैरह के सब अंतर गायब हो जाते हैं। यही सच्चा धर्म है। ‘रामकृष्ण परमहंस ने काली की मूर्ति में अटूट विश्वास के सहारे मुक्ति पा ली थी। विश्वास करने वाले को अपनी आस्था के सामने किसी व्याख्या की जरूरत नहीं होती।

तभी तो कुछ बंगाली यह मानते हैं कि दुर्गापूजा की षष्ठी के दिन जब पुजारी माँ की आगमनी की पूजा करते समय उनकी छाती पर हाथ रखकर मंत्रोच्चार करते हैं, तब पलभर को माँ की छाती धड़क उठती है। हो सकता है बुद्धिवादी इसकी खिल्ली उड़ाएँ। ‘आज समाज में उच्छृंखलता, असहिष्णुता आदि की जो समस्याएँ हैं, उनके पीछे प्रमुख कारण मनुष्य का प्रभुता का मद है।

वह दिखावे और अहंकार के मकड़जाल में फँसता जा रहा है। घर का कोई उत्सव हो या बाहर कोई सभा, वह उन्हें उस स्तर पर करना चाहता है, जैसी पहले किसी ने कभी भी न की हो। ऐसे लेखों की है यह पुस्तक ‘ तौहीद के माट में रंग दे’ जिसकी भाषा विद्वतापूर्ण तथा शैली आकर्षक है।

Quantity
Regular price INR. 495
Regular price Sale price INR. 495
Sale Sold out
Shipping calculated at checkout.

Product Details

Language

  • HIN- Hindi

ISBN

9789392719431

Binding

Hard Cover

Age Group

  • All Age Groups
  • Adults
View full details