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Tori

Tori

R. Pandey

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तोरी एक बहुत ही लाभप्रद सब्जी है। इसके फल, पत्ते, बेल, फूल अर्थात् सब कुछ ही औषधीय गुण रखते हैं। तोरी के कई प्रकार हैं लेकिन भारत में दो ही तरह की तोरी प्रचलित हैं घिया तोरी और धार तोरी। घिया तोरी को नेनुआ भी कहा जाता है और धार तोरी को तुरई के नाम से भी जाना जाता है।

गुण धर्म की दृष्टि से घिया तोरी धार तोरी से श्रेष्ठ मानी गई है। धिया तोरी और धार तोरी दोनों की ही सब्जी खाई जाती है और विविध रोगों में इनके पत्ते, बीज प्रयोग में लाए जाते हैं। कड़वी घिया तोरी और कड़वी धार तोरी खाने के काम में नहीं आती हैं। विविध रोगों के शमन के लिए इनका प्रयोग औषधि के रूप में किया जाता है। कड़वी तोरी जंगलों में अपने आप ही उग जाती है और वृक्षों पर फैलकर फलती-फूलती है।

मीठी तोरी अनेक रोगों में पथ्य के रूप में रोगी को दी जाती है, जिसका सेवन कर वह रोगमुक्त होता है। स्त्री रोग हो, चाहे पुरुष रोग हो या चाहे उदर रोग हो या चाहे गुप्त रोग हो, इन सबमें ही मीठी तोरी एक उत्तम सुपथ्य के रूप में इस्तेमाल की जाती है। तोरी के औषधीय प्रयोग इस पुस्तक में देने के साथ-साथ किन-किन रोगों में तोरी पथ्य है, यह भी बताया गया है। आशा है सुधि पाठक इनका पर्याप्त लाभ उठा पाएँगे।

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Regular price INR. 236
Regular price INR. 295 Sale price INR. 236
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Product Details

Language

  • HIN- Hindi

ISBN

9789392690372

Binding

Hard Cover

Age Group

  • All Age Groups
  • Adults
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