Trishool
Trishool
Dr. Kiran Kumari
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जब-जब धर्म की हानि हुई है, जनमानस का विश्वास धर्म से उठने लगा है अथवा धर्म पर किए गए कुठाराघात से लोगों की धार्मिक आस्था को चोट पहुँची है तब-तब हमारे धर्म के पुरोधाओं धार्मिक पुनर्जागरण का बिगुल बजाकर धर्म की रक्षा की है। ऐसे ही धार्मिक पुनर्जागरण के प्रणेता वाल्मीकि आठवीं सदी में, तुलसीदास सोलहवीं सदी में एवं शिवाअवतार सांईं बाबा उन्नीसवीं एवं बीसवीं सदी में धर्म के उत्थान के लिए वाल्मीकि रामायण, तुलसीदास रामचरितमानस की रचना की। श्री सांईं बाबा ने समाज में धार्मिक विश्वास जगाकर समाज का मार्गदर्शन किया। इस पुस्तक में इन्हीं तीनों महात्माओं के जीवन चरित पर प्रकाश डाला गया है। साथ ही अन्य कविताएँ भी हैं जो धार्मिक, आध्यात्मिक एवं नैतिक मूल्यों को पुनः स्थापित करती हैं।
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Product Details
Language
Language
- HIN- Hindi
ISBN
ISBN
9789392734908
Binding
Binding
Hard Cover
Age Group
Age Group
- Adults
