Vaanijya Prashnottri
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जब उपभोक्ता बाजार में वस्तुओं और सेवाओं की खरीद करता है तो वह अलग-अलग कीमत पर उनकी अलग-अलग मात्रएं खरीदता है। कीमतें के बढ़ने और घटने का वस्तुओं के क्रय और विक्रय पर प्रभाव पड़ता है। एक विक्रेता वस्तु की कीमत निर्धारित करते समय कुछ बातों को धयान में रखता है। ये बात हैं। 1. परिवहन लागत। 2. लाभ। 3. अन्य विक्रेताओं द्वारा निर्धारित कीमत। क्रेता उसी विक्रेता से सामान खरीदना पसन्द करते हैं। जो कम से कम कीमत पर वस्तु की बिक्री करता है। क्रेता वस्तु की कीमत अधिक होने पर उसकी कम मात्र खरीदते हैं। और कीमत कम होने पर उसकी अधिाक मात्र खरीदते हैं। विक्रेता अधिाक कीमत पर कम वस्तुएं और कम कीमत पर अधिक वस्तुएं बेच सकते हैं। इस प्रकार कीमत वस्तु की क्रय और विक्रय की मात्र के निर्धारण से महत्त्वपूर्ण कारक है। माँग और पूर्ति का कीमत पर प्रभाव पड़ता है। पूर्ति की अपेक्षा माँग अधिाक हो सकती है। पूर्ति की अपेक्षा माँग कम हो सकती है। या मांग या पूर्ति बराबर हो सकती है। इन तीनों ही स्थितियों में कीमत प्रभावित होती हैं। गई मात्र के बराबर होती हैं।
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