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Vigyan aur Taknik ka Yuddh kala per Prabhav

Vigyan aur Taknik ka Yuddh kala per Prabhav

Sanchita Singh

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अन्तर्राष्ट्रीय राजनीति की दृष्टि से सैनिक तकनीक में हुई प्रगति ने राष्ट्रीय-शक्ति को बहुत अधिक प्रभावित किया है। राष्ट्रों तथा सभ्यताओं का भाग्य-युद्ध तकनीक के अन्तर के कारण बहुधा निर्धारित हुआ। पन्द्रहवीं शताब्दी से लेकर सोलहवीं शताब्दी तक के अपने विकास काल में यूरोप ने युद्ध तकनीक की दृष्टि से इतनी अधिक प्रगति की कि वह पश्चिमी गोलार्द्ध, अफ्रीका तथा निकटवर्ती तथा सुदूरपूर्व के देशों की अपेक्षा कहीं बढ़कर थी। चौदहवीं तथा पन्द्रहवीं शताब्दियों में परम्परागत अस्त्रों में पैदल सेना, आग्नेय अस्त्र व तोपखाने के जुड़ जाने से शक्ति के वितरण में महत्त्वपूर्ण परिवर्तन उस पक्ष के अनुकूल हो गया जिसने इनका प्रयोग अपने शत्रु से पूर्व प्रारम्भ कर दिया था। जिन राष्ट्रों के पास अणु-शस्त्र तथा उन्हें फेंकने के साधन हैं वे अपने प्रतिद्वन्द्वियों की तुलना में तकनीकी दृष्टि से बहुत लाभपूर्ण स्थिति में हैं। अणु-प्रक्षेपास्त्रों के निर्माण के लिए उच्चस्तरीय संश्लिष्ट, गहन तकनीकी, औद्योगिक ज्ञान की आवश्यकता है। अणु प्रक्षेपास्त्रों के आधिपत्य के कारण आज अमरीका, रूस और चीन की आक्रामक एवं संहारक शक्ति अपरिमित हो गई है। इनकी तुलना में विश्व के अन्य राष्ट्र शक्ति की दृष्टि से नगण्य हो गए हैं। अतः आण्विक तकनीक ने अन्तर्राष्ट्रीय राजनीति में राज्यों के शक्ति परिमाण को मूलतः परिवर्तित कर डाला है।

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Regular price INR. 316
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Product Details

Language

  • HIN- Hindi

ISBN

9789392733154

Binding

Hard Cover

Age Group

  • Adults

No. of pages

136

Book Dimension

22.5 cm x 15 cm x 1.4 cm

Item Weight

360 grams

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