Vishwa Prasiddh Bhartiya Purush Khiladi
Vishwa Prasiddh Bhartiya Purush Khiladi
P.K.Sharma
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भारत में प्राचीन समय से ही खेलों के प्रति अपना एक अलग रुझान रहा है। प्राचीन काल में शांति के समय योद्धाओं के बीच प्रतिस्पर्धा के साथ खेलों का विकास हुआ। दौड़, मुक्केबाजी, कुश्ती और रथों की दौड़, सैनिक प्रशिक्षण का हिस्सा हुआ करते थे। भारत ने सदैव विश्व पटल पर एक से बढ़कर एक प्रतिस्पर्धाओं को जन्म दिया है। वर्तमान में ही नहीं भारत ने भूतकाल में भी अर्जुन और एकलव्य एवं कर्ण जैसे धनुर्धर को लाकर एक उदाहरण की पराकाष्ठा को प्रस्तुत किया है भारत के बारे में यदि हम यह कहें कि भारत की धरती खेल में भी सूरमाओं की धरती रही है, तो ऐसा कहना कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। भारतीय खेल इतिहास में मेजर ध्यानचंद से लेकर मिल्खा सिंह जैसे अनेक शूरमाओं ने अपनी खेल प्रतिभा का लोहा विश्व पटल पर मनवाया। कहा तो यह जाता है कि ध्यानचंद की हॉकी के जादू को देखकर महान तानाशाह हिटलर भी नतमस्तक हो गया था। आज हम अपने को एक खेल राष्ट्र के रूप में प्रस्तुत नहीं कर सकते परन्तु स्थितियां हमारी पकड़ में हैं, और खेलों के लिए अनिवार्य-उत्कृष्टता, भागीदारी, निवेश, मानव-पूंजी एवं दृष्टि के संयोग से भारत में खेलों के वातावरण को सम्पूर्ण बना सकते हैं।
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Product Details
Language
Language
- HIN- Hindi
ISBN
ISBN
9789392680427
Binding
Binding
Hard Cover
Age Group
Age Group
- Adults
