Vishwaprasiddh Khel : Hockey
Vishwaprasiddh Khel : Hockey
Sanchita Singh
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ओलंपिक में भारत के राष्ट्रीय खेल हॉकी का स्वर्णिम इतिहास खिलाड़ियों को इस खेल में बेहतरीन प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित करता रहा है और आखिरकार 41 साल बाद वह मौका आ गया जब भारतीय टीम ने हॉकी में ब्रॉन्ज मेडल के साथ पोडियम फिनिश किया। इस जीत के साथ भारत में फिर से जश्न का माहौल बन गया। 41 वर्षों के सूखे के बाद टीम इंडिया ने इतिहास रच दिया। लोगों में भरा उत्साह और जोश देखकर लग रहा है कि क्रिकेट कितना भी नाम कमा ले, असली दिल तो हॉकी ही है। भारत में हॉकी के जादूगर कहे जाने वाले ध्यानचंद ने अंतर्राष्ट्रीय मैचों में इतने गोल किए थे कि उनकी हॉकी स्टिक को तुड़वाकर चेक किया गया था कि कहीं उसमें चुंबक तो नहीं लगा है। ध्यानचंद के बाद भी देश में कई हॉकी के खिलाड़ी रहे, जो 1928 में हॉकी के जादूगर के रूप में शुरू हुए। भारत के ओलंपिक के स्वर्णिम सफर को आगे ले गए। ओलंपिक में भारतीय पुरुष हॉकी टीम का इतिहास शानदार रहा है। भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने 1928, 1932, 1948, 1952 और 1956 में स्वर्ण पदक पर कब्जा जमाया। 1960 में रजत के बाद 1964 में फिर से स्वर्ण पदक पर कब्जा जमाया।
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Sanchita Singh
