Yamlok Chitragupt Adalat
Yamlok Chitragupt Adalat
Rampal Singh
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जब सत्य की असत्य से लड़ाई होगी, तो सत्य अकेला खड़ा होगा और असत्य की फौज लंबी होगी क्योंकि असत्य के पीछे मूर्खा का भी झुंड होगा। जो व्यक्ति शरीर, आत्मा तथा इनसे भी परे परमात्मा के अंतर को समझ लेता है, उसे इस भौतिक जगत से मोक्ष प्राप्त होता है। मेरा परम धाम न तो सूर्य या चंद्रमा द्वारा, न ही अग्नि या बिजली द्वारा प्रकाशित होता है। जो लोग वहाँ पहुँच जाते हैं, वे इस भौतिक जगत में फिर नहीं लौटते। अपने इस शरीर को त्यागते समय मनुष्य जिस भाव का स्मरण करता है, वह अगले जन्म में उस भाव को निश्चित रूप से प्राप्त होता है। यद्यपि मैं अजन्मा तथा अविनाशी हूँ और यद्यपि मैं समस्त जीवों का स्वामी हूँ, तो भी प्रत्येक युग में मैं अपने आदि दिव्य रूप में प्रकट होता हूँ। जब भी और जहाँ भी धर्म का पतन होता है और अधर्म की प्रधानता होने लगती है, तब-तब मैं अवतार लेता हूँ।
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Product Details
Language
Language
- HIN- Hindi
ISBN
ISBN
9789392608377
Binding
Binding
Hard Cover
Age Group
Age Group
- Adults
