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Ye Mulyawan Vichar
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आज हमारे छात्र-छात्राएँ तथा युवा शक्ति भी अपने आचरण को उतना स्तरीय नहीं रख पा रहे जितनी समाज को जरूरत है। माता-पिता भी कभी-कभी अपने आचरण का अवमूल्यन कर, वैसी अनुकरणीय छवि प्रस्तुत नहीं कर पाते जैसी हमारे देश को आवश्यकता है। बातचीत, व्यवहार, चरित्र, लेन-देन, वेश-भूषा... मतलब पूरी जीवन पद्धति उत्तम हो, ताकि सन्तानें भी वही मार्ग अपनाएँ जो माता-पिता लक्षित करते हैं। बच्चे तभी सुसंस्कारित होंगे, जब बड़ों का व्यवहार आदर्श हो। हमारा लक्ष्य है कि समाज का हर छोटा-बड़ा नागरिक परम्पराओं का पालन करे। अनुशासन में रहे। भारतीय संस्कृति का पोषण करते हुए सम्मानजनक जीवन व्यतीत करे। यही पुस्तक का उद्देश्य है।
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