Yog Aur Swasth Jivan
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साधारणतया यह समझा जाता है कि योगशास्त्र तो योगियों के लिए है। यह नितान्त अज्ञान की बात है। वास्तविकता यह है कि योग बाल-युवा-प्रौढ़ सबके लिए है- मानव मात्र के लिए है तथा विवाहितों के लिए तो योग परमावश्यक है। अंग्रेजी ढंग से शिक्षित तथा योग को 'योगा' कहनेवाले विद्वान योगासनों को ही योग समझते हैं। योग के आठ अंग हैं। उनमें एक अंग आसन है। योग क्या है और विवाहितों के लिए योग क्यों परमावश्यक है- इसका इस पुस्तक में वर्णन किया गया है। हमको यह नहीं भूलना चाहिए कि भारत के संस्कृति-पुरुष श्रीकृष्ण विवाहित होते हुए भी 'योगेश्वर' की उपाधि से विभूषित थे। योगविद्या भारत की वह ज्ञान-निधि है जो संसार में अन्य किसी देश के पास नहीं है। इसी विद्या-निधि के ही कारण भारत ने अतीत में जगद् गुरु का पद प्राप्त किया था। वेदना का विषय है कि आज भारतीय शिक्षाविद् यौन शिक्षा को पाठ्यक्रम में सम्मिलित करने की बात तो करते हैं परन्तु योगशिक्षा की चर्चा ही नहीं करते। रामायण, महाभारत काल में योगशिक्षा गुरुकुलों में दी जाती थी। पाठक प्रतिदिन केवल तीस मिनट का समय देकर अपने जीवन को स्वर्ग अर्थात् त्रिविध-ताप (तीन प्रकार के दुःख) रहित बना सकते हैं। योग के अभ्यास से पाठकों की उन्नति का पथ प्रशस्त होगा। आपके पुरुषार्थ पर ही आपकी उन्नति अवलम्बित है। अच्छी बात का शुभारम्भआज ही कीजिए।
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