Skip to product information
1 of 1

Yog Vigyan Tatha Vyavharik Jivan Main Uski Upyogita

Yog Vigyan Tatha Vyavharik Jivan Main Uski Upyogita

SKU:

इस ग्रन्थ में योग के विषय में जो कुछ दिया गया है वह लेखक का अपना कुछ नहीं है। यह ज्ञान हमारी पीढ़ी को उत्तराधिकार में प्राप्त हुआ है। प्राचीन काल से सीने सीनं तथा पीढ़ी-दर-पीढ़ी यह चला रहा है। हमने तो इसे केवल सुगम तथा सुबोध भाषा में क्रमबद्ध ढंग से रखने का प्रयास किया है ताकि सामान्य से सामान्य व्यक्ति भी अपने बुजुगों को इस थातो को समझ सके तथा लाभ उठा सके। योग को हमारे देश में एक अत्यन्त कठिन साधना तथा तपस्या के रूप में लिया जाता है। इस पुस्तक के द्वारा हमने यह समझाने का प्रयास किया है कि इस योग के विभिन्न भेद हैं जो कठिन भी हैं तथा अत्यन्त सरल भी हैं और जिन्हें मनुष्य अपने मस्तिष्क के विकास के अनुसार तथा अपनी सामर्थ्य एवं परिस्थितियों के अनुसार चुन सकता है। योग मनुष्य को. जीवन के लक्ष्य तक तो पहुंचा ही सकता है. नित्यप्रति के जीवन में भी चाहे यह किसी भी क्षेत्र में हो, बेहद उपयोगी सिद्ध हो सकता है। हमारी कोशिश है कि पाठकों की जिज्ञासा हो इस पुस्तक द्वारा शान्त हो बल्कि उनमें जिज्ञासा उत्पन्न भी हो ताकि वे इस अमूल्य निधि से वंचित रह पाएँ। हमने बहुत ही आसान ढंग से समझाने की चेष्टा की है तथा अन्त में अपने थोड़े-बहुत अनुभव भी आपके समक्ष सिर झुकाते हुए रखे है ताकि आप यह जानें की सच्ची लगन और सतत अभ्यास बहुत शीघ्र फलदाई होते हैं। 'उद्धरेदात्मनात्मानम्' अर्थात् "अपने हो सहारे अपना उद्धार करना पड़ेगा।"

Quantity
Regular price INR. 895
Regular price Sale price INR. 895
Sale Sold out
Shipping calculated at checkout.

Binding


Author

View full details