Yuddh Aur Aapda Prabandhan
Yuddh Aur Aapda Prabandhan
Virender Singh
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वर्तमान की सभी सैन्य गतिविधियाँ चाहे उनकी परिस्थिति कैसी भी रही हो वे मनुष्य को सिर्फ आघात ही पहुँचाती या पहुँचा रही हैं। युद्ध की परिस्थितियों से दो प्रकार की क्षतिपूर्णता निर्मित होती है। प्रथम प्राकृतिक आवास नष्ट होते हैं। द्वितीय समुदायों की सामाजिक व्यवस्थाएँ छिन्न-भिन्न हो जाती हैं। विकासशील अथवा अविकसित राष्ट्रों में युद्ध की स्थिति और भी भयावह हो जाती है, क्योंकि यहाँ की मुख्य समस्याएँ जैसे पर्यावरण की शिथिलता, कुपोषण, रोग, बेरोजगारी, आर्थिक अस्वस्थता सभी कुछ में वृद्धि होती है। ये सामाजिक एवं भौतिक युद्ध के आघातों को झेल नहीं पाते। युद्ध के कारण निर्मित क्षति आर्थिक दृष्टि से भारपूर्ण होने के अतिरिक्त पर्यावरण की दृष्टि से घातक बन जाती है। गैस, विषाक्तता के प्रभाव अनुमानों से कहीं अधिक घातक सिद्ध होते हैं। 20वीं व 21वीं सदी के पहले डेढ़ दशक में हुए सभी छोटे व बड़े युद्धों के परिणाम देखें तो उनके चित्र विनाशकारी ही अंकित होते हैं जिनकी कभी कल्पना भी सम्भव नहीं हो पाती थी।
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Product Details
Language
Language
- HIN- Hindi
ISBN
ISBN
9789392680458
Binding
Binding
Hard Cover
Age Group
Age Group
- Adults
No. of pages
No. of pages
232
Book Dimension
Book Dimension
22.5 cm x 15 cm x 2 cm
Item Weight
Item Weight
480 grams
