Yugal Mitra Aur Anya Kahaniyan
Yugal Mitra Aur Anya Kahaniyan
Babu Ram Paliwal
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इस पुस्तक के प्रथम भाग में 'युगल- मित्र और अन्य कहानियाँ' जैसे- 'वर-माला'; 'रश्मि'; 'अभिलाषा का अंत'; 'दार्शनिक की पत्नी'; 'खुली छत' है। कहानियों में भावुकता और मानवीय मूल्यों की रचनात्मक प्रस्तुति है। द्वितीय भाग में 'जान पर आ बनती है-बीमारी का हाल बता कर' आदि संकलित लेखों द्वारा जीवन में सादगी का सौंदर्य सँजोकर कुशलतापूर्वक अभिव्यक्त किया है। सभी रचनाएँ मनोबल और आत्मीयता से भरपूर हैं और मौलिक चिंतन और आधुनिक चेतना दर्शाती है। विचार-दर्शन और व्यक्तित्व की अभिव्यक्ति लेखक की ओर आकर्षित कर देती है। तृतीय भाग में 'कहानी और कहानीकार' में विभिन्न पुस्तकों और साहित्यकारों की महानता को स्थापित किया गया है। साहित्यकार-कवि श्री बाबूराम पालीवाल जी ने अपनी रचनाएँ बिना किसी प्रतिकार के, जन-हितार्थ सौंप दी।
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Binding
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Hard Cover
Author
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Babu Ram Paliwal
