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Zindagi Sawal Hai Sahi Batte ka

Zindagi Sawal Hai Sahi Batte ka

Kanan Jhingan

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हम सब एक ही नूर से उपजे हैं, इसलिए राजा-रंक, सफल-असफल मूल रूप से एक हैं। सबकी अन्तिम परिणति एक है। फिर दुर्भाव क्यों? इटली का एक मुहावरा इसी अंजाम की ओर इशारा करता है: शतरंज का खेल खत्म होने पर बादशाह और प्यादा सब एक ही डिब्बे में बंद हो जाते हैं। फिर जीवन के खेल में बादशाह क्यों न नम्र हो और प्यादे को भी नाचीज़ क्यों मानें?

बाज़ी ख़त्म होने पर हम सब क्षण में जिएँ, अतीत व्यतीत हो गया, भविष्य अनदेखा है, वर्तमान आँखों के सामने हैं। भयमुक्त होकर एक-एक पल से आनन्दकण बटोर लें। किसी के देय को अदत्त न रहने दें। अनागत की चिन्ता न करें। उसे नेपथ्य में ही रहने दें- 'नेपथ्य में ही रहने दो अनागत को 

जीवन मार्ग पर चलते हुए कोई घटना, कोई व्यक्ति जो हमें प्रकाश के दर्शन की कराता है वही हमारा गुरु है। मन धरती को इतना उर्वर बनाने की आवश्यकता है कि किसी भी दिशा से आकर ज्ञान का बीज गिरे तो वह पनप उठे। - 'शब्दगुरु'

'परिवार' एक ऑरकेस्ट्रा है। प्रत्येक वाद्य को एक ही सुर में, एक ही लय में बद्ध होकर बजना होता है। एक सुर उतरा नहीं, एक लय चूकी नहीं कि इस अलौकिक संगीत की समरसता भंग हो जाती है। - 'परिवार में समरसता

कृष्ण पराक्रमी हैं, सघन प्रेमी हैं। इन्द्र के कोप से गोकुलवासियों को बचाने के लिए गोवर्धन को उठा सकते हैं। एक बार भी उनकी अँगुली अस्थिर नहीं हुई। यह वर्षा ऋतु का जादू ही था कि राधा की एक गहन दृष्टि ने उन्हें कँपा दिया, रोमांचित कर दिया। - रिमझिम फुहार में जीवन के रंग

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Product Details

Language

  • HIN- Hindi

ISBN

9788196741716

Binding

Hard Cover

Age Group

  • All Age Groups
  • Adults
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